शुक्रवार, 14 सितंबर 2018

नींद

घात से उबारती रोतो को हँसाती।
रात के प्यारे सपनो में मुस्कुराती।।

होती जब सुबह तो साफ़ होती तस्वीर।
बीते दिन से पलट जाती पूरी तकदीर।।

होती साथ नयी हिम्मत और ताक़त ।
कोमल होते कच्चे फल जो थे सख्त।।

नींद की आदत है सपनो में नयी दुनिया दिखाना।
ये प्रण हमारा सपने को साकार करके ही दिखाना।।

शुक्रवार, 7 सितंबर 2018

रात

बादल में छुपे सूरज तो उसे रात नहीं कहते
बुझ न सके आग तो उसे बे आग नहीं कहते।
अँधेरे में न हो उजाला तो हर चीज काली नहीं हो जाती
उबलते पानी में कभी अपनी परछाई देखी नहीं जाती।।

होती सदा अंत कष्ट की
राह पहुँचती ध्येय पे।
चोटिल घावों से बढ़ साहस
लक्ष्य मिले सब हिम्मत से।।

गुरुवार, 6 सितंबर 2018

किताब

न मुझसे कही गयी
न तुम्हारी सुनी गयी।
न बयां हो सकी
न दफ़न हो सकी।।

सूखे में थी बरसात
अकेलेपन में दी साथ।
अँधेरे में बनी चिराग
ये मेरी किताब।।

नींद

घात से उबारती रोतो को हँसाती। रात के प्यारे सपनो में मुस्कुराती।। होती जब सुबह तो साफ़ होती तस्वीर। बीते दिन से पलट जाती पूरी तकदीर।। हो...