बुधवार, 22 अगस्त 2018

सूर्यास्त

है सूर्यास्त जो होने वाली है
शाम भी अब ढलने वाली है।

लोग थक चुके अब काम कर कर
आराम की चांदनी फैलेगी हर घर।

सूर्य भी जा चुका अब घर अपने
बच्चे भी खेलने लगे खिलौने।

सुबह से जो निकली वो किरण
अब नींद की बनेगी विकिरण।

लिखती सदा ये एक चिर कथा अनंत
सूर्यास्त तो है केवल एक पृष्ठ का अंत।

समझ चुके पक्षी की होने वाली है रात
आते होंगे माँ बाप आज के दाने के साथ।

होगी फिर सूर्योदय एक नई शुरुआत
हम होंगे संग होगी हमारी मुलाकात।

मंगलवार, 21 अगस्त 2018

अपराध

किसी ने धन को चुराया किसी ने कमा के लाने वाले को
किसी ने प्यार को ठुकराया किसी ने प्यार करने वाले को

किसी ने रोते को हसाया किसी ने हॅसते दिया रुला
दुनिया जन्नत होती अगर न होता कोई गिला शिकवा

तबियत तो तभी गयी थी हो ख़राब
जब साथ देने वाले हुए थे खिलाफ

यूँ तो जापान फिर भी जीत जाता
दो परमाणु बम भी झेल जाता

अगर लोग ना होते खुद के खिलाफ
तो चीन क्या अमेरिका भी जीत जाता जापान

इतिहास है गवाह की लोगो ने दिखाया है
जब नहीं जरुरत हर नूर को भुलाया है

चलते थे सीना तान के हम भी लेकिन
खंजर जो पीठ पे खा लगे देखने पीछे

सूरज और प्रकृति भी दुखी है मनुष्य से
मौसम क साथ बदलते है जो रिश्ते इनसे 

आज कल तो सजा ऐ जुर्म यु बेबसी में होती है
जुर्म अगर संगीन हो तो सजा कठोर होती है

अपराध बोध के बिना आरोपी अपराधी नहीं होता
हर आरोपी हर बार सजा का हक़दार नहीं होता

शनिवार, 18 अगस्त 2018

गीली मिट्टी

विकसित विचारधारा की खोज में  संभावना के सागर में बहती मेरी सोच की नाव न जाने कब उस किनारे पहुँचेगी कई बार मैंने बाहरी समस्याओँ के तूफान झेले है तो कभी असत्य का जहर पिया है रास्ता इतना भी मुश्किल न था जितना मैने जिया है कुछ थी गलतियाँ मेरे सीने में जो अब मेहनत की कब्र में सोने जा रही है पर दुनिया को नही फुरसत अभी भी सीने को छलनी करने बार बार कुरेद रहें है।

डरते लोग शून्य से है
मैं तो डरा अनंत से ही
हारा तो मैं कभी नही
जीत भी तो मिली नही
सुनु रास्तो की या खुद
रास्ता ही ना बन जाऊ
बन उजाला दुसरो को
सच की ये राह दिखाऊ
सांस का तो धोखा है
जिंदगी तो तोहफा है
न जाने कब किस घड़ी
ये तोहफा भी छिन जाए
दिन के उजाले में
वो रात ना आ जाये
जब सब रोये और
हम ही सो जाएं

गुरुवार, 16 अगस्त 2018

है अंत नहीं प्रारम्भ है ये

यू तो हर व्यक्ति का व्यक्तित्व कुछ खास होता है
कुछ न कुछ करने हर एक का प्रयास होता हैं।
लग जाती है शताब्दियां उस एक मानव के जन्म में
जिसके एक कदम में सारा जग उसके साथ होता है।।

राष्ट्र के लिए बने राष्ट्र के लिए जिये है जो अटल
हार भी हार जाती जिसके सम्मुख वो शस्त्र है अटल।
कोई व्यक्ति नही बल्कि वो व्यक्तित्व और विचार है अटल
जहाँ सीमा भी बंधन तोड़ दे वो मुस्कान हैं अटल।।

मन होता है उदास जब ध्यान में आता न हैं वो पास
ना हो कम उत्साह करते हम निरंतर अथक प्रयास।
न जाने कब ये भावनाओ की तकलीफ दूर होगी
उम्मीद है कविता में ही सही मुलाकात होती रहेंगी।।

अटल...................कवि और लेखक कभी मरते नहीं................वो अटल अमर और अजेय है

सुबह से जो चला हूँ न रुका न थका हूँ
जीतना था जग खुद को जीतने चला हूँ
हो शाम या रात न करूँगा तनिक आराम मैं।
न होगी कोई रुकावट न अल्पविराम तय
है साँझ ऐसी तो न जाने सुबह कैसी होगी
जब साथ नहीं अटल तो जीत कैसे होगी।।

राह मेरी मुश्किल पर हार न मेरी होगी 
है अगर समस्या तो समाधान भी होगी  
फिर उठूंगा गिरकर तेज़ धार मेरी होगी ।
है अटल संग मेरे बुनियाद मेरी बनके
हर रात मेरी होगी हर प्रभात मेरी होंगी
हर राह तेरी होंगी पर मंजिल मेरी होंगी।।

मंगलवार, 14 अगस्त 2018

शुभ स्वतंत्रता दिवस(७२)

भारतीय स्वतंत्रता दिवस

 5 - प्रतिज्ञा करे की

एक दिन की देशभक्ति की जगह 
आज से हम
१. रोज १० मिनट देश के लिए कुर्बान हुए शहीदों और इतिहास को याद करेंगे जिससे हम अपने भविष्य को सुमार्ग प्रदान कर सके। हर उस व्यक्ति को उत्साहित करेंगे जो अंजुमन में कोई सकारात्मक पहलू रखे फिर चाहे वो कितना भी मुश्किल क्यों न हो।


२. क्योकि देश हमसे है और देश से हम तो प्रतिदिन ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे जिससे हमे या देश को कोई नुकसान हो। सदा देश के लिए स्वयं और दुसरो के समर्पण का इस्तकबाल करेंगे।


३. भारत की संस्कृति और विश्व हिंदुत्व की रक्षा के लिए अगर किसी मार्ग पे धर्म-पंथ या संप्रदाय भी आहत हो तो भी अपना मार्ग प्रशस्त करेंगे, कभी भी जाति धर्म या समुदाय के नाम पे लड़ने वालो को कोई तवज्जो नहीं देंगे।


४. "अहिंसा परमो धर्म:" पे चलते हुए जहाँ तक संभव हो हिंसा से दूर रहेंगे, शाकाहार ही इस क्षेत्र की उत्तम भोज्य है, अतः जिन क्षेत्रो में पर्याप्त संसाधन हो वहाँ पूर्ण शाकाहार का पालन करेंगे जिससे देश के संसाधनों का उचित विकास हो सके।

 

5. प्रति दिन अपने निर्धारित कार्य के अलावा हम एक या कुछ ऐसे कार्य करेंगे या सीखेंगे जिससे न सिर्फ हमारा कौशल विकसित हो बल्कि साथ ही साथ देश के उन्नति के लिए भी प्रभावी हो।

 

इतिहास

हर वर्ष 15 अगस्त को मनाया जाता है। सन् 1947 में इसी दिन भारत के निवासियों ने ब्रिटिश शासन से स्‍वतंत्रता प्राप्त की थी। यह भारत का राष्ट्रीय त्यौहार है। प्रतिवर्ष इस दिन भारत के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से देश को सम्बोधित करते हैं। 15 अगस्त 1947 के दिन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने, दिल्ली में लाल किले के लाहौरी गेट के ऊपर, भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। महात्मा गाँधी के नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में लोगों ने काफी हद तक अहिंसक प्रतिरोध और सविनय अवज्ञा आंदोलनों में हिस्सा लिया। स्वतंत्रता के बाद ब्रिटिश भारत को धार्मिक आधार पर विभाजित किया गया, जिसमें भारत और पाकिस्तान का उदय हुआ। विभाजन के बाद दोनों देशों में हिंसक दंगे भड़क गए और सांप्रदायिक हिंसा की अनेक घटनाएं हुईं। विभाजन के कारण मनुष्य जाति के इतिहास में इतनी ज्यादा संख्या में लोगों का विस्थापन कभी नहीं हुआ। यह संख्या तकरीबन 1.45 करोड़ थी। 1951 की विस्थापित जनगणना के अनुसार विभाजन के एकदम बाद 72,26,000 मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गये और 72,49,000 हिन्दू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आए।
इस दिन को झंडा फहराने के समारोह, परेड और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ पूरे भारत में मनाया जाता है। भारतीय इस दिन अपनी पोशाक, सामान, घरों और वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित कर इस उत्सव को मनाते हैं और परिवार व दोस्तों के साथ देशभक्ति फिल्में देखते हैं, देशभक्ति के गीत सुनते हैं।
 साभार(विकिपीडिया)

-Mait

साहस और परिश्रम

मौका खोजने वालो को इंतज़ार करना पड़ता है
इंतज़ार करने वालो को मौका नही मिलता है
जिनको मौका मिलता है वो किसी तलाश में है
जो तलाश में लोग है वो न जाने किस उम्मीद में है
उम्मीद तो केवल आधी अधूरी आशा होती है
ऐसी आशा तो केवल साहस का भी अंत करवा देती है
साहस और परिश्रम की जंग में जीत किसी की भी हो
हार हमेशा साहस ना करने वाले कि होती है
जो साहस करते है वही परिश्रमी होते है

"जैसे विचार के साथ शून्यता परिणाम विहीन होती है 
वैसे ही ज्ञान के साथ बुद्धिमत्ता का ना होना अर्थहीन होता है।"

-Mait

रविवार, 12 अगस्त 2018

84 कठिनाइयाँ - समाधान तथ्य

कर्म हो अच्छे या निकृष्ट 
परिणाम हो शुन्य या उत्कृष्ट 
होती विजय सदा तथ्य की
ना झूठ की ना सत्य की
कर्म ही धम्म है
धम्म ही धर्म है 


किसी व्यक्ति ने जब बुद्ध की ख्याति सुनी तो वह उनके दर्शन और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उनके पास गया. जैसा हम सबके जीवन में प्रायः होता है, वह किसान भी अनेक कठिनाइयों का सामना कर रहा था. उसे लगा कि बुद्ध उसे कठिनाइयों से निकलने का उपाय बता देंगे. उसने बुद्ध से कहा:
“मैं किसान हूँ. मुझे खेती करना अच्छा लगता है. लेकिन कभी वर्षा पर्याप्त नहीं होती और मेरी फसल बर्बाद हो जाती है. पिछले साल हमारे पास खाने को कुछ भी नहीं था. और फिर कभी ऐसा भी होता है कि बहुत अधिक वर्षा हो जाती है और हमारी फसल को नुकसान पहुँचता है.”
बुद्ध शांतिपूर्वक उसकी बात सुनते रहे.

“मैं विवाहित हूँ”, किसान ने कहा, “मेरी पत्नी मेरा ध्यान रखती है… मैं उससे प्रेम करता हूँ. लेकिन कभी-कभी वह मुझे बहुत परेशान कर देती है. कभी मुझे लगने लगता है कि मैं उससे उकता गया हूँ”.
बुद्ध शांतिपूर्वक उसकी बात सुनते रहे.
“मेरे बच्चे भी हैं”, किसान बोला, “वे भले हैं… पर कभी-कभी वे मेरी अवज्ञा कर बैठते हैं. और कभी तो…”
किसान ऐसी ही बातें बुद्ध से कहता गया. वाकई उसके जीवन में बहुत सारी समस्याएँ थीं. अपना मन हल्का कर लेने के बाद वह चुप हो गया और प्रतीक्षा करने लगा कि बुद्ध उसे कुछ उपाय बताएँगे.
उसकी आशा के विपरीत, बुद्ध ने कहा, “मैं तुम्हारी कोई सहायता नहीं कर सकता.”
“ये आप क्या कह रहे हैं?”, किसान ने हतप्रभ होकर कहा.
“सभी के जीवन में कठिनाइयाँ हैं”, बुद्ध ने कहा, “वास्तविकता यह है कि हम सबके जीवन में 83 कठिनाइयाँ हैं, मेरा, तुम्हारा, और यहाँ उपस्थित हर व्यक्ति का जीवन समस्याओं से ग्रस्त है. तुम इन 83 समस्याओं का कोई समाधान नहीं कर सकते. यदि तुम कठोर कर्म करो और उनमें से किन्हीं एक का उपाय कर भी लो तो उसके स्थान पर एक नयी समस्या खड़ी हो जायेगी. जीवन का कोई भरोसा नहीं है. एक दिन तुम्हारी प्रियजन चल बसेंगे, तुम भी एक दिन नहीं रहोगे. समस्याएँ सदैव बनी रहेंगीं और कोई भी उनका कुछ उपाय नहीं कर सकता.”
किसान क्रुद्ध हो गया और बोला, “सब कहते हैं कि आप महात्मा हो! मैं यहाँ इस आस में आया था कि आप मेरी कुछ सहायता करोगे! यदि आप इतनी छोटी-छोटी बातों का उपाय नहीं कर सकते तो आपकी शिक्षाएं किस काम की!?”
बुद्ध ने कहा, “मैं तुम्हारी 84वीं समस्या का समाधान कर सकता हूँ”.
“84वीं समस्या?”, किसान ने कहा, “वह क्या है?”
बुद्ध ने कहा, “यह कि तुम नहीं चाहते कि जीवन में कोई समस्या हो”.

तो आप मेरी 84 वीं समस्या ही सुलझा दें,” वह व्यक्ति पुनः विनम्र होते हुए बोला। “और ऐसा मैं कैसे करूँ?” उसने पूछा।
बुद्ध मुस्कुराए और व्यक्ति के नेत्रों में गहराई से देखने लगे, वे नेत्र जो लालसा, भ्रम, व चिंता से परिपूर्ण थे।

यदि तुम समझ लो कि जीवन कभी समस्याओं से रहित होता ही नहीं, तो वह इतना बुरा नहीं लगेगा।”
हालांकि उस व्यक्ति को अपनी आशानुसार हल नहीं मिला, तथापि बुद्ध की करुणामयी दृष्टि से उसे शांति का अनुभव हुआ, भले ही अस्थाई रूप से।
बुद्ध ने यह कहते हुए वार्ता समाप्त की – “विनम्र बनो, उद्दात बनो। जीवन को उसके उस रूप से आगे देखना सीखो जैसा ‘आप’ उसे देखना चाहते हो।”

साभार(सिद्धार्थ गौतम)
-अमित कुमार मौर्य 

शनिवार, 11 अगस्त 2018

कहानी

परिंदो की कहानी, उड़ान लिखती है
जीत की कहानी, हर हार लिखती है।

आसमान की कहानी, सितारे लिखते है
सूरज की कहानी, हर सुबह लिखती है।

अचरज की कहानी, धैर्य लिखती है
फ़तह की कहानी, कोशिशे लिखती है।

फूलो की कहानी,कलियों ने लिखी है
जंग की कहानी, गलतफहमियों ने।

विकास की कहानी, नवोन्मेष ने लिखी है
चरित्र कि कहानी, संस्कारो ने लिखी है।

खुदा की कहानी भी मैंने लिखी है
इंसान की कहानी भी मैंने लिखी है

हर दिन की कहानी भी मैंने लिखी है
हर रात की कहानी भी मैंने लिखी है 

कुछ कहानी लोगो ने सुनी है
कुछ कहानी लोगो ने बनाई है।

जब जब बात कहानी पे आयी है
याद सिर्फ मुझको मेरी ही आयी है।

कहानी तो कहानी है
जो सदियों पुरानी है।
झूठ संग पानी है
सच की ये रानी है।।

आज सुनो

आज सुनो


कर्म की आग में तुम हो
धर्म के राग में तुम हो
जन्म के उपहार में तुम हो
जीव के संहार में तुम हो
।।
 
सत्य की राह पे मैं हूँ
धर्म की चाह में मैं हूँ
 मृत्यु की पनाह में मैं हूँ
खुद के इंतज़ार में मैं हूँ
।।

 तुम शाम की बची धुप हो
मैं भोर के पहले की रात्रि हूँ
 कुछ पल में खुद को खो दोगी
मैं दिन बन जहाँ में छाऊँगा
।।
 
तुम थक चुकी अब इस पहर
मैं थकावट सब की मिटाऊंगा

न कोई गांव न बचा कोई शहर
नयी सुबह जब होगी इस पहर
।।
 
तुम अंत हो कार्य दिवस का
मैं आरम्भ हु इस जग का
 नए दिन न हो कोई उदास
उजाले से होता ये प्रयास
।।

थका वही जो रुका कही
उठा वही जो रुका नहीं
 बंधा वही जो टूटा कही
जीता वही जो हारा कही
।।

सुनो बस आज मेरी बात
फिर कह लेना सारी रात
 ना मैं कुछ कहूंगा इसके बाद
न हो पायेगी कोई मुलाकात।।।।

-Mait

शुक्रवार, 10 अगस्त 2018

सारे जहाँ से अच्छा

रात की छाँव में
दिन की धूप में
गीत की धुन में

शोर के मौन में
शान्ति के खौफ में
जीत की हार में

खुशियो की डोर में
जन्मो के भोर में
आतंक के दौर में

रहस्य की खोज में
कर्मो के योग में
घटनाओ के संयोग में

अनंत के अंत में
अंत के अनंत में
शीत के समर में

पर्वत के शिखर में
समुद्र के गर्त में
प्रकृति के मर्म में

सारे जहां से अच्छी 
मुस्कान है तुम्हारी

मुस्कान ही वो अंत है
जहां खुशिया अनंत है
कर्म हो कितने सख्त ही
रख मुस्कान एक दरख्त ही

बहे क्यो न रक्त ही
टूटे ध्येर्य जब कभी
कर मुस्कान अमर ही
जीत होगी तेरी ही

स्वीकार न तू हार को
साहस की बना ढाल तू
रख सहस्त्र मुस्कान तू
शत्रु न देख पाए तो

तोड़ दे भ्रम भूल सारे ग़म
उठा कदम और अपने हाथ
साहस और ध्येय के साथ
दिशाएँ सारी होंगी साथ

अस्त्र- शस्र्त्र और है गाथा  ये 
हर युद्ध की विजय शलाका है ये
सभी की एक पहचान ये
हर एक की मुस्कान ये।।।।



-Mait

समानता


समानता


ऊँच नीच और भेद भाव
शहर बड़े और छोटे गांव
हैसियत और ये हक़ीक़त
खुदा भी न हो सके सहमत

ये जमीन और आसमान
होती यदि जो घमासान
मिल भिड़े जो एक बार
मिट जाएंगे नामो निशान

समानता का नारा दे कर
करते जो तुम व्यापार
छोटो को बड़ो से और
बड़ो को छोटो से दूर

रात की चादर जो हटी
निकली जो उजली किरण
न होने पाए कोई धोखा
खत्म हो ये विविधीकरण

व्यापारी हो या कर्मचारी
न भिन्न है अब उम्मीदवारी
न होगा कोई किसी पे भारी
अब होगी दुनिया उजियारी||||

-अमित कुमार मौर्य

मंगलवार, 7 अगस्त 2018

जब तक


जब तक
अंकुर न बनता वृक्ष तब तक
पोषण न होता उसका जब तक।
अभिलाषा नहीं ये प्रण है मेरा
साथ न छूटे सुख से तेरा ।।

रहे उजाला हर पल हर क्षण
मुस्कान हो सदा तेरी तीक्ष्ण।
देते सदा उलाहना उसको
ना साँस रुके न जी पाए।।

रोतो को और रुलाना
और हसतो को खिलखिलाना।
चली आयी ये रीत पुरानी
न समझ पाया कोई ये कहानी।।

सब बैठे है उस इंतज़ार में
करे कब कोई दूजा गलती।
रुला रुला के जान देती है बख्श
अश्रुधारा से पूरी होती मुस्कान ।।

उम्र भर जो ढंग से जी सके
वो देते रहे राय की हम कमर कसे।।
जब तक रहेगा किस्मत में काल
करते रहेगी दुनिया इस्तकबाल।।

-Mait

सोमवार, 6 अगस्त 2018

संघर्ष

 संघर्ष

संघर्ष एक शस्त्र है
असफलता के समुद्र में
मिलता है गहराई में।
जीत में न हार में
न कभी एक बार में
ये कोशिशों के सैलाब में।।

संघर्ष एक अस्त्र है
अभिलाषा जब शिखर की
तो चलता क्यों रेत पे।
नदियाँ न मुड़ी कभी
तो मुड़ता क्यों घडी घडी
सीधा चल उस ध्येय पे।।

संघर्ष एक चाह है
सोच ली जो जीत की
तो नजरे क्यों रीत पे।
जग हँसा हर हार पे
जो जीत की नींव बनी
तू खुद का मन जीत ले ।।


संघर्ष एक राह है
पथिक की ये चाह है
रुके न किसी दहलीज पे।
बन सूरज तू गगन का
रोशन कर पूरा समां
संघर्ष की यही रीत है।।

संघर्ष से रख तू दोस्ती
ये भोर की काली रात है
इसी में तेरी जीत है
इसी में मेरी जीत है ।।

-Mait

विकास

"विकास का लक्ष्य"

अगर बार बार घरो के गिरने के कारण गहरी नींव का विकास न होता तो आज गगनचुम्बी इमारते सिर्फ कहानियो में होती जमीन पे नही.

360° घूम कर किसी को भी धोखा हो सकता है कि वो तो हिला भी नही आप धीरे धीरे पूरा चक्कर काट चुके होते है।

जब कोई व्यक्ति अपने मार्ग पे आगे बढ़ता है लेकिन किसी कारण अगर लक्ष्य तक पहुंच नहीं पाता तो उसको ये वहम होना बेहद आम बात है की उसने कुछ नहीं किया पर कई बार ये असफल प्रयास लक्ष्य तक पहुंच चुके तथाकथित सफल लोगो के प्रयास से उत्कृष्ट और प्रशंसनीय हो सकता है.

विश्वास खुद पे होना चाहिए जब लोग प्लूटो जैसे मेहनती प्लेनेट को जो सूर्य का धरती से सैकड़ो गुना ज्यादा बड़ा पथ तय करता है उस को सिर्फ एक भौतिकी की काट के कारण ग्रहो तक की श्रेणी से अलग कर सकते है तो एक व्यक्ति क्या है, लेकिन क्या इससे उस प्लूटो के किसी भी 1 सेकंड के चक्कर लगाने में परिवर्तन हुआ या होगा नामुमकिन है क्योंकि उसे उसका लक्ष्य पता है। 

लक्ष्य रहित व्यक्ति, वस्तु और समय हमेशा शून्य में बदल जाते है

मिलते है अगले पोस्ट में तब तक के लिए धन्यवाद
आपका समय शुभ हो


शनिवार, 4 अगस्त 2018

प्यार

प्यार
(To Read in English Click Here)
सभी को सुप्रभात,
जीवन का पहला और सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण हिस्सा प्यार है।
प्यार का कोई प्रकार नहीं है क्योंकि केवल प्रेम ही स्वयं ही "प्यार" है।
यह या तो "आंतरिक" या "बाहरी"  रूप में होगा, लेकिन सच्चा प्यार किसी के द्वारा प्यार करने वाले व्यक्ति के साथ "मैत्री" है।
प्यार का महत्व:
प्यार एक-दूसरे की देखभाल करने, एक-दूसरे को समझने, एक-दूसरे को सुनकर और एक-दूसरे से खुश होने के बारे में है। और बहुत ईमानदार प्यार होने के लिए पूरी तरह से समझा नहीं जा सकता है। यह केवल कुछ हद तक भविष्यवाणी की जा सकती है। प्यार मनुष्यों को ज्ञात सबसे गहन भावनाओं में से एक है।
प्यार मनुष्यों की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है:
आठ मानव आवश्यकताएं:
1. प्यार: हमारे जीवन में एकता, जुनून, एकता, गर्मी, इच्छा, और प्यार महसूस करने की आवश्यकता।
2. शुद्धता: सुरक्षित, आरामदायक, सुरक्षित, स्थिर, संरक्षित, और हमारे जीवन में भविष्यवाणी करने की आवश्यकता महसूस करने की आवश्यकता।
3. महत्व: महत्वपूर्ण, उपलब्धि, सम्मान, विशेष, आवश्यक, वांछित, और हमारे जीवन में अद्वितीय महसूस करने की आवश्यकता।
4. विविधता: हमारे जीवन में अलग, चुनौतीपूर्ण, जोखिम, परिवर्तन, उत्तेजना, आश्चर्य और मनोरंजन महसूस करने की आवश्यकता।
5.विकास: ऐसा महसूस करने की आवश्यकता है कि हम विकास, सीखने, मजबूत करने, विस्तार करने और खुद को खेती कर रहे हैं।
6.अतिरिक्त: ऐसा महसूस करने की आवश्यकता है कि हम अपने निशान, सेवा, पेशकश और दूसरों को योगदान दे रहे हैं, दान कर रहे हैं।
7. संतुष्टि: किसी की इच्छाओं, अपेक्षाओं, या जरूरतों की पूर्ति, या इससे प्राप्त आनंद।
8. फीडबैक: किसी व्यवहार उत्पाद की प्रतिक्रियाओं के बारे में जानकारी, किसी व्यक्ति के कार्य का प्रदर्शन, इत्यादि जिसे सुधार के आधार के रूप में उपयोग किया जाता है।
तो हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि जीवन प्यार के बिना कुछ भी नहीं है।
देखभाल के मुकाबले अगली पोस्ट में चर्चा पढ़ने के लिए धन्यवाद, प्यार के साथ बहुत अच्छा समय है।

आइना

चले थे कल सुबह पढ़ने पूरी किताब पर दूसरा पन्ना पलटने की न हुई हिम्मत। दिखा गया पहला पन्ना हमें वो आइना देख जिसे शर्म लज्जा से हुआ सामना।। ...