शनिवार, 18 अगस्त 2018

गीली मिट्टी

विकसित विचारधारा की खोज में  संभावना के सागर में बहती मेरी सोच की नाव न जाने कब उस किनारे पहुँचेगी कई बार मैंने बाहरी समस्याओँ के तूफान झेले है तो कभी असत्य का जहर पिया है रास्ता इतना भी मुश्किल न था जितना मैने जिया है कुछ थी गलतियाँ मेरे सीने में जो अब मेहनत की कब्र में सोने जा रही है पर दुनिया को नही फुरसत अभी भी सीने को छलनी करने बार बार कुरेद रहें है।

डरते लोग शून्य से है
मैं तो डरा अनंत से ही
हारा तो मैं कभी नही
जीत भी तो मिली नही
सुनु रास्तो की या खुद
रास्ता ही ना बन जाऊ
बन उजाला दुसरो को
सच की ये राह दिखाऊ
सांस का तो धोखा है
जिंदगी तो तोहफा है
न जाने कब किस घड़ी
ये तोहफा भी छिन जाए
दिन के उजाले में
वो रात ना आ जाये
जब सब रोये और
हम ही सो जाएं

गुरुवार, 16 अगस्त 2018

है अंत नहीं प्रारम्भ है ये

यू तो हर व्यक्ति का व्यक्तित्व कुछ खास होता है
कुछ न कुछ करने हर एक का प्रयास होता हैं।
लग जाती है शताब्दियां उस एक मानव के जन्म में
जिसके एक कदम में सारा जग उसके साथ होता है।।

राष्ट्र के लिए बने राष्ट्र के लिए जिये है जो अटल
हार भी हार जाती जिसके सम्मुख वो शस्त्र है अटल।
कोई व्यक्ति नही बल्कि वो व्यक्तित्व और विचार है अटल
जहाँ सीमा भी बंधन तोड़ दे वो मुस्कान हैं अटल।।

मन होता है उदास जब ध्यान में आता न हैं वो पास
ना हो कम उत्साह करते हम निरंतर अथक प्रयास।
न जाने कब ये भावनाओ की तकलीफ दूर होगी
उम्मीद है कविता में ही सही मुलाकात होती रहेंगी।।

अटल...................कवि और लेखक कभी मरते नहीं................वो अटल अमर और अजेय है

सुबह से जो चला हूँ न रुका न थका हूँ
जीतना था जग खुद को जीतने चला हूँ
हो शाम या रात न करूँगा तनिक आराम मैं।
न होगी कोई रुकावट न अल्पविराम तय
है साँझ ऐसी तो न जाने सुबह कैसी होगी
जब साथ नहीं अटल तो जीत कैसे होगी।।

राह मेरी मुश्किल पर हार न मेरी होगी 
है अगर समस्या तो समाधान भी होगी  
फिर उठूंगा गिरकर तेज़ धार मेरी होगी ।
है अटल संग मेरे बुनियाद मेरी बनके
हर रात मेरी होगी हर प्रभात मेरी होंगी
हर राह तेरी होंगी पर मंजिल मेरी होंगी।।

मंगलवार, 14 अगस्त 2018

शुभ स्वतंत्रता दिवस(७२)

भारतीय स्वतंत्रता दिवस

 5 - प्रतिज्ञा करे की

एक दिन की देशभक्ति की जगह 
आज से हम
१. रोज १० मिनट देश के लिए कुर्बान हुए शहीदों और इतिहास को याद करेंगे जिससे हम अपने भविष्य को सुमार्ग प्रदान कर सके। हर उस व्यक्ति को उत्साहित करेंगे जो अंजुमन में कोई सकारात्मक पहलू रखे फिर चाहे वो कितना भी मुश्किल क्यों न हो।


२. क्योकि देश हमसे है और देश से हम तो प्रतिदिन ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे जिससे हमे या देश को कोई नुकसान हो। सदा देश के लिए स्वयं और दुसरो के समर्पण का इस्तकबाल करेंगे।


३. भारत की संस्कृति और विश्व हिंदुत्व की रक्षा के लिए अगर किसी मार्ग पे धर्म-पंथ या संप्रदाय भी आहत हो तो भी अपना मार्ग प्रशस्त करेंगे, कभी भी जाति धर्म या समुदाय के नाम पे लड़ने वालो को कोई तवज्जो नहीं देंगे।


४. "अहिंसा परमो धर्म:" पे चलते हुए जहाँ तक संभव हो हिंसा से दूर रहेंगे, शाकाहार ही इस क्षेत्र की उत्तम भोज्य है, अतः जिन क्षेत्रो में पर्याप्त संसाधन हो वहाँ पूर्ण शाकाहार का पालन करेंगे जिससे देश के संसाधनों का उचित विकास हो सके।

 

5. प्रति दिन अपने निर्धारित कार्य के अलावा हम एक या कुछ ऐसे कार्य करेंगे या सीखेंगे जिससे न सिर्फ हमारा कौशल विकसित हो बल्कि साथ ही साथ देश के उन्नति के लिए भी प्रभावी हो।

 

इतिहास

हर वर्ष 15 अगस्त को मनाया जाता है। सन् 1947 में इसी दिन भारत के निवासियों ने ब्रिटिश शासन से स्‍वतंत्रता प्राप्त की थी। यह भारत का राष्ट्रीय त्यौहार है। प्रतिवर्ष इस दिन भारत के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से देश को सम्बोधित करते हैं। 15 अगस्त 1947 के दिन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने, दिल्ली में लाल किले के लाहौरी गेट के ऊपर, भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। महात्मा गाँधी के नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में लोगों ने काफी हद तक अहिंसक प्रतिरोध और सविनय अवज्ञा आंदोलनों में हिस्सा लिया। स्वतंत्रता के बाद ब्रिटिश भारत को धार्मिक आधार पर विभाजित किया गया, जिसमें भारत और पाकिस्तान का उदय हुआ। विभाजन के बाद दोनों देशों में हिंसक दंगे भड़क गए और सांप्रदायिक हिंसा की अनेक घटनाएं हुईं। विभाजन के कारण मनुष्य जाति के इतिहास में इतनी ज्यादा संख्या में लोगों का विस्थापन कभी नहीं हुआ। यह संख्या तकरीबन 1.45 करोड़ थी। 1951 की विस्थापित जनगणना के अनुसार विभाजन के एकदम बाद 72,26,000 मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गये और 72,49,000 हिन्दू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आए।
इस दिन को झंडा फहराने के समारोह, परेड और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ पूरे भारत में मनाया जाता है। भारतीय इस दिन अपनी पोशाक, सामान, घरों और वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित कर इस उत्सव को मनाते हैं और परिवार व दोस्तों के साथ देशभक्ति फिल्में देखते हैं, देशभक्ति के गीत सुनते हैं।
 साभार(विकिपीडिया)

-Mait

साहस और परिश्रम

मौका खोजने वालो को इंतज़ार करना पड़ता है
इंतज़ार करने वालो को मौका नही मिलता है
जिनको मौका मिलता है वो किसी तलाश में है
जो तलाश में लोग है वो न जाने किस उम्मीद में है
उम्मीद तो केवल आधी अधूरी आशा होती है
ऐसी आशा तो केवल साहस का भी अंत करवा देती है
साहस और परिश्रम की जंग में जीत किसी की भी हो
हार हमेशा साहस ना करने वाले कि होती है
जो साहस करते है वही परिश्रमी होते है

"जैसे विचार के साथ शून्यता परिणाम विहीन होती है 
वैसे ही ज्ञान के साथ बुद्धिमत्ता का ना होना अर्थहीन होता है।"

-Mait

गीली मिट्टी

विकसित विचारधारा की खोज में  संभावना के सागर में बहती मेरी सोच की नाव न जाने कब उस किनारे पहुँचेगी कई बार मैंने बाहरी समस्याओँ के तूफान झे...