मंगलवार, 21 अगस्त 2018

अपराध

किसी ने धन को चुराया किसी ने कमा के लाने वाले को
किसी ने प्यार को ठुकराया किसी ने प्यार करने वाले को

किसी ने रोते को हसाया किसी ने हॅसते दिया रुला
दुनिया जन्नत होती अगर न होता कोई गिला शिकवा

तबियत तो तभी गयी थी हो ख़राब
जब साथ देने वाले हुए थे खिलाफ

यूँ तो जापान फिर भी जीत जाता
दो परमाणु बम भी झेल जाता

अगर लोग ना होते खुद के खिलाफ
तो चीन क्या अमेरिका भी जीत जाता जापान

इतिहास है गवाह की लोगो ने दिखाया है
जब नहीं जरुरत हर नूर को भुलाया है

चलते थे सीना तान के हम भी लेकिन
खंजर जो पीठ पे खा लगे देखने पीछे

सूरज और प्रकृति भी दुखी है मनुष्य से
मौसम क साथ बदलते है जो रिश्ते इनसे 

आज कल तो सजा ऐ जुर्म यु बेबसी में होती है
जुर्म अगर संगीन हो तो सजा कठोर होती है

अपराध बोध के बिना आरोपी अपराधी नहीं होता
हर आरोपी हर बार सजा का हक़दार नहीं होता

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