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राह
भटकाव है या जो फितरत है तुम्हारी जो तुम अपने रास्ते अलग कर जाओगे दर्द हो या तकलीफ या हो कोई बीमारी देख लेना एक दिन यूँ बहुत पछ्ताओगे राह...
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बढ़ने लगे हद से ज्यादा जग में हैवानियत जब होने लगे ज़माने भर में हमारी जिल्लत कर्म क्षेत्र में हो वक़्त की बेइंतहा किल्लत संदेह में हो जब हम...
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सुधार ........ करनी होगी बिगड़ी जो तबियत है रूठी जो किस्मत है वक़्त की जो जरूरत हालात की मरम्मत। वक़्त की ये ललकार नव किरणों की बौछार पक्षियों...
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जब धूप हो बाल्टी भर भूख समुद्र से बढ़ कर मजदूर भागे काम पर क्षुधा अग्नि के नाम पर। श्रम के स्वेद से स्नान कर अपनी छाती तान कर कर्म को ही पूज...
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