बुधवार, 22 अगस्त 2018

सूर्यास्त

है सूर्यास्त जो होने वाली है
शाम भी अब ढलने वाली है।

लोग थक चुके अब काम कर कर
आराम की चांदनी फैलेगी हर घर।

सूर्य भी जा चुका अब घर अपने
बच्चे भी खेलने लगे खिलौने।

सुबह से जो निकली वो किरण
अब नींद की बनेगी विकिरण।

लिखती सदा ये एक चिर कथा अनंत
सूर्यास्त तो है केवल एक पृष्ठ का अंत।

समझ चुके पक्षी की होने वाली है रात
आते होंगे माँ बाप आज के दाने के साथ।

होगी फिर सूर्योदय एक नई शुरुआत
हम होंगे संग होगी हमारी मुलाकात।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

जिसको देखो

जिसको देखो वही रो रहा है किस्मत पे न चाह कर्म की न राह धर्म की अनंत मार्ग के मध्य शून्य की रौशनी में चल रहा अविचल मनुष्यत्व है या छ...